H-1B Visa पर फिर बढ़ा विवाद: 22 अमेरिकी अटॉर्नी जनरल ने $103,265 के प्रस्ताव का किया विरोध, भारतीय IT प्रोफेशनल्स पर क्या होगा असर?
22 अमेरिकी अटॉर्नी जनरल ने $103,265 फीस का किया विरोध, भारतीय IT प्रोफेशनल्स पर क्या असर?

वॉशिंगटन/नई दिल्ली, 26 सितंबर 2026: अमेरिका में H-1B वीजा को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। 22 अमेरिकी राज्यों और वॉशिंगटन डीसी के अटॉर्नी जनरल ने अमेरिकी प्रशासन द्वारा प्रस्तावित $103,265 के H-1B शुल्क/टैक्स का विरोध किया है। 24 सितंबर को दाखिल किए गए संयुक्त कमेंट लेटर में अटॉर्नी जनरलों ने तर्क दिया कि प्रस्तावित राशि से राज्यों और स्थानीय सरकारों के लिए जरूरी कुशल कर्मचारियों की भर्ती प्रभावित हो सकती है।

यह घटनाक्रम खास तौर पर भारतीय IT प्रोफेशनल्स और अमेरिका में कर्मचारियों को भेजने वाली भारतीय कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि H-1B कार्यक्रम अमेरिकी कंपनियों को विशेष कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने की अनुमति देता है।
$103,265 का प्रस्ताव क्या है?
अमेरिकी Department of Homeland Security (DHS) के तहत USCIS ने 25 अगस्त 2026 को एक प्रस्तावित नियम प्रकाशित किया था, जिसमें कुछ non-cap-exempt employers द्वारा दाखिल H-1B petitions पर $103,265 का शुल्क/टैक्स लगाने का प्रस्ताव है। 22 अटॉर्नी जनरल ने इसी प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की है।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। खबरों में इसे अक्सर “H-1B visa fee” कहा जा रहा है, लेकिन कैलिफोर्निया अटॉर्नी जनरल के कार्यालय की आधिकारिक जानकारी में इसे tax के रूप में वर्णित किया गया है। प्रस्ताव अभी अंतिम नियम नहीं है।
22 अटॉर्नी जनरल क्यों कर रहे हैं विरोध?
कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल Rob Bonta और मैसाचुसेट्स की अटॉर्नी जनरल Andrea Joy Campbell ने इस संयुक्त टिप्पणी का नेतृत्व किया। उनके साथ Arizona, Colorado, Connecticut, Delaware, District of Columbia, Hawaii, Illinois, Maine, Maryland, Michigan, Minnesota, Nevada, New Jersey, New Mexico, New York, North Carolina, Oregon, Virginia, Washington और Wisconsin के अटॉर्नी जनरल भी शामिल हैं।
संयुक्त पत्र में अटॉर्नी जनरलों ने मुख्य रूप से चार तरह की आपत्तियां उठाई हैं:
- उनका कहना है कि इतना बड़ा शुल्क राज्यों की कुशल कर्मचारियों की कमी दूर करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
- उन्होंने प्रस्तावित शुल्क के लिए USCIS की कानूनी अधिकारिता पर सवाल उठाया है।
- उनका तर्क है कि इसे टैक्स के रूप में लागू करने के लिए कांग्रेस की स्पष्ट अनुमति जरूरी हो सकती है।
- उन्होंने 30 दिनों की सार्वजनिक टिप्पणी अवधि को भी अपर्याप्त बताया है।
शिक्षा और हेल्थकेयर सेक्टर पर भी चिंता
अटॉर्नी जनरलों की आपत्ति केवल IT सेक्टर तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार H-1B कार्यक्रम के जरिए राज्य और स्थानीय सरकारें शिक्षकों, डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कुशल कर्मचारियों की कमी को पूरा करने में मदद लेती हैं। प्रस्तावित अतिरिक्त लागत से इन क्षेत्रों में भर्ती करना कठिन हो सकता है—यह उनका आधिकारिक तर्क है।
इसका मतलब यह है कि विवाद का असर केवल Silicon Valley या IT कंपनियों तक सीमित रहने की संभावना पर चर्चा नहीं हो रही, बल्कि सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े रोजगार पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
भारतीय IT प्रोफेशनल्स के लिए क्यों अहम है H-1B?
H-1B वीजा लंबे समय से भारतीय टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका में काम करने का एक प्रमुख रास्ता रहा है। भारतीय कंपनियां और अमेरिका में मौजूद टेक कंपनियां इस कार्यक्रम के माध्यम से बड़ी संख्या में विदेशी कुशल कर्मचारियों को नियुक्त करती हैं।
इसलिए आवेदन की लागत में बड़ा इजाफा होने पर कंपनियों के लिए अमेरिका के बाहर से कर्मचारी लाने का खर्च बढ़ सकता है। इसका असर भर्ती के फैसलों, कर्मचारियों की relocation और कुछ कंपनियों की outsourcing रणनीतियों पर पड़ सकता है।
हालांकि, किसी खास भारतीय कर्मचारी की नौकरी, वीजा या अमेरिका में रहने की स्थिति पर इसका वास्तविक असर उसके employer, petition के प्रकार और लागू नियमों पर निर्भर करेगा।
क्या अभी $103,265 देना जरूरी है?
नहीं, $103,265 वाला प्रस्ताव अभी प्रस्तावित नियम है। 22 अटॉर्नी जनरल का विरोध इसी प्रस्तावित नियम के खिलाफ है।
लेकिन H-1B से जुड़ा $100,000 भुगतान वाला अलग प्रावधान भी मौजूद है, जिसे अमेरिकी प्रशासन ने सितंबर 2025 में लागू किया था और सितंबर 2026 में अगले 12 महीनों के लिए बढ़ाया है। व्हाइट हाउस के 18 सितंबर 2026 के आदेश के अनुसार, यह प्रतिबंध 21 सितंबर 2027 तक लागू रहने के लिए बढ़ाया गया है, कुछ अपवादों के साथ।
इसलिए फिलहाल H-1B को लेकर दो अलग घटनाक्रमों को अलग-अलग समझना जरूरी है:
| मुद्दा | वर्तमान स्थिति |
|---|---|
| $103,265 प्रस्ताव | प्रस्तावित नियम, अंतिम नहीं |
| $100,000 भुगतान प्रावधान | सितंबर 2026 में 12 महीने के लिए बढ़ाया गया |
| 22 अटॉर्नी जनरल की कार्रवाई | $103,265 प्रस्ताव के खिलाफ संयुक्त टिप्पणी |
| लक्षित क्षेत्र | कुछ नए H-1B petitions/employers, नियमों के अनुसार |
| भारतीय प्रोफेशनल्स पर असर | employer और petition की स्थिति पर निर्भर |
$100,000 वाले पुराने प्रावधान पर अदालत का क्या रुख रहा?
H-1B को लेकर कानूनी लड़ाई पहले भी अदालत तक पहुंच चुकी है। जून 2026 में एक संघीय अदालत ने $100,000 H-1B भुगतान प्रावधान को गैरकानूनी बताते हुए उसे रद्द कर दिया था। बाद में सरकार ने फैसले के खिलाफ अपील की।
सितंबर 2026 में प्रशासन ने उसी $100,000 व्यवस्था को एक और साल के लिए बढ़ा दिया है। व्हाइट हाउस के अनुसार यह प्रतिबंध उन H-1B specialty occupation workers पर लागू होता है जो अमेरिका से बाहर हैं और जिनकी petitions निर्धारित $100,000 payment के साथ नहीं हैं, हालांकि राष्ट्रीय हित से जुड़े अपवाद मौजूद हैं।
इस वजह से H-1B नीति की मौजूदा स्थिति कानूनी और नियामकीय बदलावों के बीच बनी हुई है।
सरकार का तर्क क्या है?
अमेरिकी प्रशासन H-1B कार्यक्रम में बदलावों को अमेरिकी श्रमिकों के हित, वेतन और कार्यक्रम की निगरानी से जोड़ता है। 18 सितंबर की राष्ट्रपति घोषणा में प्रशासन ने आरोप लगाया कि कुछ IT staffing और outsourcing कंपनियों ने H-1B प्रणाली का इस्तेमाल अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम वेतन वाले विदेशी कर्मचारियों को रखने के लिए किया।
व्हाइट हाउस ने यह भी कहा है कि $100,000 भुगतान और नए weighted selection process के बाद H-1B registrations में बदलाव आया है तथा उच्च वेतन और उच्च कौशल वाले उम्मीदवारों की हिस्सेदारी बढ़ी है। ये आंकड़े प्रशासन के अपने आकलन हैं।
इसके विपरीत, 22 अटॉर्नी जनरल का कहना है कि प्रस्तावित $103,265 tax से राज्यों को शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और अन्य जरूरी सेवाओं में कुशल कर्मचारियों की भर्ती करने में नुकसान हो सकता है।
भारतीय कंपनियों के लिए क्या मायने?
भारत की बड़ी IT और consulting कंपनियां अमेरिकी बाजार में बड़ी संख्या में कर्मचारियों के साथ काम करती हैं। यदि H-1B पर अतिरिक्त लागत और कड़े नियम लागू होते हैं, तो कंपनियों को अमेरिकी परियोजनाओं के लिए स्थानीय hiring, offshore delivery या अन्य staffing मॉडल पर ज्यादा निर्भरता की आवश्यकता पड़ सकती है।
हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी कि प्रस्तावित $103,265 नियम के कारण भारतीय कंपनियों की भर्ती में कितना बदलाव आएगा। इसके लिए पहले प्रस्तावित नियम का अंतिम रूप और उसके बाद उसका वास्तविक अनुपालन देखना होगा।
आगे क्या होगा?
अब DHS/USCIS को प्रस्ताव पर मिली सार्वजनिक टिप्पणियों पर विचार करना होगा। इसके बाद प्रशासन प्रस्ताव को वापस ले सकता है, उसमें बदलाव कर सकता है या अंतिम नियम जारी करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
साथ ही, H-1B पर पहले से चल रही कानूनी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण रहेगी। इसलिए अगले कुछ महीनों में $103,265 प्रस्ताव और $100,000 मौजूदा प्रतिबंध—दोनों की कानूनी स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा।
निष्कर्ष
H-1B वीजा को लेकर अमेरिका में विवाद अब एक नए चरण में पहुंच गया है। 22 अटॉर्नी जनरल ने $103,265 के प्रस्तावित H-1B tax का विरोध किया है, जबकि अमेरिकी प्रशासन H-1B प्रणाली में कड़े नियमों को अमेरिकी श्रमिकों और कार्यक्रम की अखंडता की सुरक्षा से जोड़ रहा है।
भारतीय IT प्रोफेशनल्स के लिए सबसे अहम बात यह है कि $103,265 अभी प्रस्तावित राशि है, कोई सार्वभौमिक रूप से लागू नया शुल्क नहीं। वहीं $100,000 वाला अलग प्रावधान सितंबर 2027 तक बढ़ाया गया है और उसके दायरे व अपवाद लागू नियमों पर निर्भर हैं।


