UNSC Reform: भारत ने फिर उठाई सुरक्षा परिषद में तुरंत सुधार की मांग, जयशंकर और विक्रम मिस्री ने Global South की आवाज पर दिया जोर
भारत ने सुरक्षा परिषद में तुरंत सुधार पर दिया जोर, जयशंकर-मिस्री ने उठाई Global South की आवाज

न्यूयॉर्क, 26 सितंबर 2026: संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान UN Security Council (UNSC) में सुधार का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। भारत ने विकासशील देशों और Global South को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व देने की जरूरत पर जोर दिया है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने जहां L.69 समूह की बैठक में सुरक्षा परिषद की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की जरूरत बताई, वहीं विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने G77 के विदेश मंत्रियों की बैठक में विकासशील देशों की अधिक प्रभावी आवाज और प्रतिनिधित्व की मांग दोहराई।

जयशंकर बोले- UNSC की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव जरूरी
23 सितंबर को न्यूयॉर्क में L.69 Consultative Ministerial Interaction on UNSC Reform की सह-अध्यक्षता करते हुए एस. जयशंकर ने कहा कि Global South दुनिया में हो रहे बड़े बदलावों का असर झेल रहा है, जबकि संयुक्त राष्ट्र की मौजूदा व्यवस्था उसकी अपेक्षाओं को पूरी तरह पूरा नहीं कर पा रही है। उन्होंने सुरक्षा परिषद की ओर से चल रहे संघर्षों और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के खतरों से प्रभावी ढंग से निपटने में कठिनाइयों को सुधार की जरूरत से जोड़ा।
जयशंकर ने यह भी कहा कि सुधार में देरी को जारी रखना ऐतिहासिक असमानता को बनाए रखता है। बैठक में L.69 और अफ्रीकी संघ से जुड़े C-10 समूहों के बीच सहयोग के जरिए UNSC reform के लिए दबाव बनाए रखने पर जोर दिया गया।
विक्रम मिस्री ने G77 मंच से उठाई Global South की आवाज
26 सितंबर को G77 के विदेश मंत्रियों की 50वीं वार्षिक बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य पेश किया। बैठक का विषय था “The Global South and the Future of Multilateralism”। इस मंच से भारत ने विकासशील देशों को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक आवाज और प्रतिनिधित्व देने तथा UNSC में तत्काल सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।
G77 विकासशील देशों का एक व्यापक समूह है और संयुक्त राष्ट्र की बहुपक्षीय प्रक्रिया में विकास, आर्थिक न्याय तथा Global South की प्राथमिकताओं से जुड़े मुद्दों पर समन्वय करता है। भारत ने इस मंच का इस्तेमाल यह रेखांकित करने के लिए किया कि वैश्विक शासन संस्थाओं में प्रतिनिधित्व मौजूदा अंतरराष्ट्रीय वास्तविकताओं के अनुरूप होना चाहिए।
G4 ने भी की UNSC में जल्द सुधार की मांग
भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान—यानी G4—ने भी 22 सितंबर को न्यूयॉर्क में सुरक्षा परिषद सुधार पर संयुक्त रुख दोहराया। चारों देशों के विदेश मंत्रियों ने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों में UNSC reform पहले से कहीं अधिक जरूरी है। उन्होंने परिषद के स्थायी और गैर-स्थायी दोनों वर्गों में विस्तार को सुधार का केंद्रीय हिस्सा बताया।
G4 ने विशेष रूप से अफ्रीका, एशिया-प्रशांत और लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन जैसे कम प्रतिनिधित्व वाले क्षेत्रों को ज्यादा जगह देने की जरूरत बताई। समूह ने Intergovernmental Negotiations (IGN) प्रक्रिया में ठोस प्रगति की कमी पर भी चिंता जताई और टेक्स्ट-बेस्ड बातचीत को प्राथमिकता देने की बात कही।
भारत की स्थायी सदस्यता की मांग से जुड़ा है सुधार अभियान
भारत लंबे समय से विस्तारित सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है। जुलाई 2026 में भारत ने 2028-29 कार्यकाल के लिए UNSC की गैर-स्थायी सीट की अपनी उम्मीदवारी भी शुरू की थी। उस समय जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद को वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया था।
हालिया घटनाक्रम में भारत की इस मांग को कुछ नए अंतरराष्ट्रीय समर्थन भी मिले हैं। 22 सितंबर को Visegrád Group (पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य) ने UNSC की स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी का समर्थन किया।
हालांकि समर्थन के बावजूद स्थायी सदस्यता के सवाल पर संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के बीच व्यापक सहमति अभी बनी नहीं है। सुरक्षा परिषद में बदलाव के लिए अलग-अलग देशों और क्षेत्रीय समूहों के प्रस्तावों में सदस्यता के विस्तार, वीटो और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को लेकर मतभेद मौजूद हैं।
अभी UNSC में कितने सदस्य हैं?
संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक सुरक्षा परिषद में 15 सदस्य हैं। इनमें 5 स्थायी सदस्य—अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस—और 10 गैर-स्थायी सदस्य होते हैं। गैर-स्थायी सदस्य महासभा द्वारा दो साल की अवधि के लिए चुने जाते हैं।
पांच स्थायी सदस्यों के पास वीटो पावर है। किसी महत्वपूर्ण गैर-प्रक्रियात्मक प्रस्ताव को पारित करने के लिए कम से कम नौ मतों की जरूरत होती है, जिसमें किसी स्थायी सदस्य का नकारात्मक वोट प्रस्ताव को रोक सकता है।
यही मौजूदा ढांचा UNSC reform की बहस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। सुधार समर्थक देश चाहते हैं कि परिषद में आज की वैश्विक शक्ति-संरचना और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व बेहतर तरीके से प्रतिबिंबित हो।
Global South के लिए प्रतिनिधित्व क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत और उसके साथ UNSC reform की मांग कर रहे देशों का तर्क है कि दुनिया की राजनीतिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय तस्वीर 1945 की तुलना में काफी बदल चुकी है। संयुक्त राष्ट्र की मौजूदा संरचना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी थी, जबकि आज एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका की भूमिका वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
भारत का कहना है कि विकासशील देशों पर युद्ध, खाद्य और ऊर्जा संकट, जलवायु परिवर्तन, व्यापार व्यवधान तथा कर्ज जैसी वैश्विक चुनौतियों का असर पड़ता है, लेकिन इन मुद्दों पर निर्णय लेने वाली संस्थाओं में उनका प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत सीमित है। यही वजह है कि भारत Global South की अधिक सक्रिय भागीदारी को UNSC reform से जोड़ रहा है।
सुधार की प्रक्रिया में सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
UNSC reform पर वर्षों से बातचीत चल रही है, लेकिन सदस्य देशों के बीच यह सहमति नहीं बन पाई है कि परिषद का नया आकार क्या हो, स्थायी सदस्यों की संख्या कितनी बढ़े, नए सदस्यों को वीटो मिले या नहीं और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व कैसे तय किया जाए।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भी Intergovernmental Negotiations (IGN) प्रक्रिया जारी है। आधिकारिक UN रिकॉर्ड में दर्ज है कि 2026-27 सत्र में भी सुरक्षा परिषद के विस्तार और समान प्रतिनिधित्व पर वार्ता आगे बढ़ाई जा रही है।
इसलिए भारत की ओर से “तुरंत सुधार” का आह्वान राजनीतिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ाने का हिस्सा है, जबकि वास्तविक सुधार के लिए महासभा के सदस्य देशों के बीच व्यापक सहमति और अंततः संयुक्त राष्ट्र चार्टर में आवश्यक बदलावों की जरूरत होगी।
भारत के लिए आगे की राह
UNGA के मौजूदा सत्र में भारत समानांतर रूप से कई मंचों पर UNSC reform का मुद्दा उठा रहा है—L.69, G77 और G4 इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इसके अलावा भारत को V4 देशों से स्थायी सदस्यता के लिए समर्थन मिला है।
भारत की रणनीति में केवल अपनी स्थायी सीट की मांग ही नहीं, बल्कि विकासशील देशों, विशेष रूप से अफ्रीका और Global South, के व्यापक प्रतिनिधित्व की बात भी शामिल है। 12 सितंबर की BRICS घोषणा में भी परिषद में विकासशील देशों की अधिक भागीदारी और UN Security Council में व्यापक सुधार के समर्थन को दोहराया गया था।
आने वाले समय में मुख्य सवाल यह रहेगा कि क्या UNGA की वार्ताएं केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहती हैं या सदस्य देश टेक्स्ट-बेस्ड बातचीत और ठोस प्रस्तावों की दिशा में आगे बढ़ते हैं।


