PM Modi Semiconductor Roundtable: ग्लोबल चिप सप्लाई चेन में भारत की बड़ी छलांग, आज दिग्गज CEOs से PM मोदी की बैठक
PM Modi Semiconductor Roundtable: ग्लोबल CEOs से आज बैठक, भारत बनेगा चिप सप्लाई चेन का हब

भारत को ग्लोबल सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में केंद्र सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 16 सितंबर 2026 को दुनिया की प्रमुख सेमीकंडक्टर और टेक कंपनियों के CEOs के साथ राउंड टेबल बैठक करेंगे। यह बैठक SEMICON India 2026 से ठीक एक दिन पहले हो रही है, जिसका फोकस भारत को वैश्विक चिप सप्लाई चेन में मजबूत भूमिका दिलाने पर है।

अमेरिका, जापान, जर्मनी और मलेशिया की कंपनियों से बातचीत
राउंड टेबल में अमेरिका, जापान, जर्मनी, मलेशिया समेत कई प्रमुख टेक और सेमीकंडक्टर बाजारों की कंपनियों की भागीदारी है। सरकार का लक्ष्य सिर्फ भारत में चिप असेंबली या पैकेजिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि सेमीकंडक्टर की पूरी वैल्यू चेन को देश में विकसित करना है।
इसमें चिप डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, एडवांस पैकेजिंग, सेमीकंडक्टर उपकरण, विशेष सामग्री, कंपोनेंट और रिसर्च जैसे क्षेत्र शामिल हैं। SEMICON India 2026 में भी वैश्विक कंपनियों और भारतीय कंपनियों के बीच सप्लाई चेन और टेक्नोलॉजी साझेदारी को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा।
भारत क्यों बढ़ा रहा है सेमीकंडक्टर पर फोकस?
सेमीकंडक्टर आज मोबाइल फोन, कार, कंप्यूटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा उपकरण, दूरसंचार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम जैसे लगभग हर आधुनिक क्षेत्र के लिए जरूरी हैं। ऐसे में चिप की सप्लाई पर निर्भरता किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए रणनीतिक मुद्दा बन चुकी है।
सरकार भारत में घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ विदेशी कंपनियों को यहां निवेश और तकनीकी साझेदारी के लिए आकर्षित कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत अभी अपनी चिप जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए घरेलू क्षमता बढ़ाना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
SEMICON India 2026 में दिखेगी भारत की बढ़ती ताकत
SEMICON India 2026 का आयोजन 17 से 19 सितंबर तक नई दिल्ली के यशोभूमि में किया जाएगा। इसका थीम “Silicon to Systems: Building the Ecosystem” रखा गया है।
PIB के अनुसार, इस बार आयोजन में 600 से ज्यादा प्रदर्शक, 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां और 40 से अधिक देशों के प्रतिनिधिमंडल शामिल होंगे। इसका उद्देश्य भारत की बढ़ती सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षमता को वैश्विक कंपनियों के सामने प्रदर्शित करना और निवेश, तकनीक तथा सप्लाई चेन साझेदारी को बढ़ावा देना है।
1.27 लाख करोड़ रुपये के Semicon 2.0 पर भी जोर
भारत ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए Semicon 2.0 को भी मंजूरी दी है। इसके तहत करीब 1,27,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कार्यक्रम का दायरा सिर्फ चिप निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजाइन, फैब्रिकेशन, एडवांस पैकेजिंग, उपकरण, विशेष सामग्री, R&D और स्किल डेवलपमेंट तक फैला हुआ है।
सरकार की कोशिश है कि भारत में सेमीकंडक्टर की ऐसी पूरी इकोसिस्टम तैयार हो, जिसमें चिप डिजाइन से लेकर निर्माण, पैकेजिंग और अंतिम इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम तक की कड़ियां देश में मौजूद हों।
कई बड़ी कंपनियां पहले से भारत में कर रही हैं निवेश
भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को विकसित करने के लिए कई वैश्विक और घरेलू कंपनियां पहले ही परियोजनाओं पर काम कर रही हैं। SEMICON India 2026 से जुड़े प्रमुख नामों में ASML, Applied Materials, Teradyne, Infineon, Micron, Tata Electronics, Lam Research, Tokyo Electron, NXP और IBM Research जैसी कंपनियां शामिल हैं।
गुजरात के साणंद और धोलेरा समेत कई स्थानों पर सेमीकंडक्टर परियोजनाओं के विकास से भारत में इस क्षेत्र का औद्योगिक आधार भी विस्तार ले रहा है।
क्या है सरकार का बड़ा लक्ष्य?
सरकार की रणनीति भारत को केवल चिप का खरीदार नहीं, बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बनाने की है। इसके लिए विदेशी कंपनियों के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, निवेश, जॉइंट वेंचर, उपकरण निर्माण और भारतीय कंपनियों को वैश्विक सप्लाई नेटवर्क से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
आज की CEO राउंड टेबल बैठक इसी व्यापक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके बाद 17 सितंबर को पीएम मोदी SEMICON India 2026 का उद्घाटन करेंगे, जहां वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग के सामने भारत की नीतियों और क्षमताओं को पेश किया जाएगा।


