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Yamuna River Rejuvenation: यमुना को मिलेगा नया जीवन, ₹15,000 करोड़ की किशाऊ परियोजना पर छह राज्यों में बनी सहमति

Yamuna River Rejuvenation: ₹15,000 करोड़ की किशाऊ परियोजना पर छह राज्यों में सहमति

देश की प्रमुख नदियों में शामिल यमुना को पुनर्जीवित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। यमुना नदी के जलप्रवाह को बेहतर बनाने और ऊपरी यमुना बेसिन में जल उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से करीब ₹15,000 करोड़ की किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर छह राज्यों के बीच सहमति बनी है। यह सहमति केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान बनी।

छह राज्यों के बीच बनी सहमति

किशाऊ परियोजना को लेकर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान ने समझौता ज्ञापन यानी MoU पर हस्ताक्षर करने पर सहमति जताई है। यह परियोजना लंबे समय से लंबित थी और राज्यों के बीच सहमति नहीं बनने के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही थी।

सरकार का मानना है कि परियोजना के पूरा होने से यमुना नदी में पानी का प्रवाह बढ़ेगा। खासकर सूखे मौसम में नदी के जलस्तर और प्रवाह को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इससे यमुना के पुनर्जीवन और नदी में प्रदूषण कम करने के प्रयासों को भी बल मिलने की उम्मीद है। <Cite refs={[“turn1search0″,”turn1search3”]} />

क्या है किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना?

किशाऊ परियोजना को यमुना की सहायक नदी टोंस पर प्रस्तावित किया गया है। यह बांध उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा के निकट बनाए जाने की योजना है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹15,000 करोड़ है, जबकि इसकी प्रस्तावित विद्युत उत्पादन क्षमता लगभग 422 मेगावाट बताई गई है। <Cite refs={[“turn1search6”]} />

यह परियोजना केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य जल भंडारण, पेयजल उपलब्धता, सिंचाई और यमुना नदी के प्रवाह को बेहतर बनाना भी है। मानसून के दौरान उपलब्ध पानी को संग्रहित कर जरूरत के समय उसका नियंत्रित उपयोग किया जा सकेगा।

यमुना नदी के लिए क्यों अहम है यह परियोजना?

यमुना नदी को कई क्षेत्रों में कम जलप्रवाह, सीवेज, औद्योगिक प्रदूषण और अनियंत्रित जल उपयोग जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। खासकर दिल्ली और उसके आसपास के हिस्सों में नदी का प्रदूषण लंबे समय से चिंता का विषय बना हुआ है।

किशाऊ परियोजना से ऊपरी यमुना बेसिन में जल भंडारण क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। इससे नदी में निर्धारित पर्यावरणीय प्रवाह बनाए रखने में मदद मिल सकती है। नदी में पर्याप्त पानी रहने पर प्रदूषकों का घनत्व कम करने और पारिस्थितिक संतुलन सुधारने में भी सहायता मिल सकती है। हालांकि, केवल बांध परियोजना से यमुना पूरी तरह साफ नहीं होगी। इसके लिए सीवेज ट्रीटमेंट, औद्योगिक कचरे पर नियंत्रण और नदी के किनारे अतिक्रमण रोकने जैसे कदम भी जरूरी होंगे। <Cite refs={[“turn1search3″,”turn1search10″,”turn1search11”]} />

केंद्र सरकार देगी 90 प्रतिशत सहायता

परियोजना से जुड़े प्रस्तावित वित्तीय ढांचे के अनुसार, जल संबंधी घटक के लिए केंद्र सरकार करीब 90 प्रतिशत वित्तीय सहायता देगी। शेष 10 प्रतिशत राशि छह राज्यों के बीच साझा की जाएगी।

बैठक में यह भी तय किया गया कि बिजली से जुड़े घटक की लागत साझा करने के बदले हिमाचल प्रदेश के हिस्से के पानी की आपूर्ति दिल्ली और राजस्थान को की जाएगी। इससे राज्यों के बीच जल बंटवारे और परियोजना की लागत को लेकर लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को दूर करने की कोशिश की गई है। <Cite refs={[“turn1search0″,”turn1search3”]} />

अभी क्या है परियोजना की स्थिति?

छह राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद किशाऊ परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, MoU पर हस्ताक्षर के बाद परियोजना को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाना था

इसलिए इसे अभी से पूरी तरह स्वीकृत या निर्माणाधीन परियोजना कहना जल्दबाजी होगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी, पर्यावरणीय और तकनीकी औपचारिकताओं तथा अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं के बाद ही परियोजना के निर्माण की दिशा स्पष्ट होगी। <Cite refs={[“turn1search0″,”turn1search6”]} />

यमुना की सफाई के लिए अन्य योजनाएं भी जरूरी

यमुना के पुनर्जीवन के लिए केंद्र और राज्य सरकारें पहले से ही कई योजनाओं पर काम कर रही हैं। इनमें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता बढ़ाना, नालों के गंदे पानी को नदी में जाने से रोकना, औद्योगिक प्रदूषण पर निगरानी और नदी में न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह बनाए रखना शामिल है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत यमुना बेसिन में सीवेज ट्रीटमेंट और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी कई परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यमुना को वास्तविक रूप से साफ करने के लिए जलप्रवाह बढ़ाने के साथ-साथ प्रदूषण के स्रोतों पर भी प्रभावी कार्रवाई करनी होगी। <Cite refs={[“turn1search11″,”turn1search15”]} />

निष्कर्ष

किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर छह राज्यों के बीच बनी सहमति यमुना नदी के पुनर्जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। करीब ₹15,000 करोड़ की इस परियोजना से जल भंडारण, बिजली उत्पादन और नदी के प्रवाह में सुधार की उम्मीद है। हालांकि, परियोजना की वास्तविक सफलता केंद्रीय मंजूरी, समयबद्ध निर्माण और यमुना में प्रदूषण रोकने के लिए समानांतर कार्रवाई पर निर्भर करेगी।

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