जन्माष्टमी पर तुलसी के बिना अधूरी क्यों है श्रीकृष्ण की पूजा?

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार दो दिन बाद ही है। ऐसे में कान्हा के भक्तों में कमाल का उत्साह देखने को मिल रहा है। भाद्रपद महीने की अष्टमी तिथि आते ही हर गली-मोहल्ले में कन्हैया लाल की के जयकारे गूंजने लगते हैं। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और ठीक रात 12 बजे अपने प्यारे बाल गोपाल का जन्मोत्सव मनाते हैं। पूजा की तैयारी लोगों ने अभी से शुरू कर दी है। चलिए जानते हैं छप्पन भोग के साथ श्रीकृष्ण को और क्या-क्या चीजें चढ़ाई जाती हैं।
क्या आप इस बात से वाकिफ हैं कि श्रीकृष्ण की पूजा में तुलसी दल का होना बहुत जरूरी है। इसके बिना भगवान श्रीकृष्ण की पूजा अधूरी मानी जाती है? पूजा में माखन और मिश्री जितनी जरूरी है, तुलसी का महत्व भी उतना ही ज्यादा है। आइए इस आर्टिकल में समझते हैं कि कान्हा को तुलसी इतनी प्यारी क्यों है।
कृष्ण और तुलसी का गहरा नाता
हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को बेहद पवित्र माना गया है। इन्हें साक्षात माता लक्ष्मी का रूप माना जाता है। श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के ही अवतार हैं, इसलिए विष्णु जी की तरह ही कान्हा को भी तुलसी बहुत प्रिय है। श्रीमद्भागवत पुराण और विष्णु पुराण में स्पष्ट लिखा है कि आप भगवान के सामने चाहे हजार तरह की मिठाइयां रख दें, लेकिन अगर उसमें तुलसी का पत्ता (तुलसी दल) नहीं है, तो भगवान उस भोग को स्वीकार ही नहीं करते। इसीलिए जन्माष्टमी के भोग में चाहे वह खीर हो या माखन तुलसी जरूर डाली जाती है।
स्कंद पुराण में एक श्लोक है, जिसमें तुलसी का महत्व बताया गया है-
“विना तुलसी दानेन यत् किंचित् दीयते हरये। तत् सर्वं निष्फलं याति…”
अर्थ: भगवान श्रीहरि को बिना तुलसी के जो कुछ भी भोग या दान अर्पित किया जाता है, वह सब निष्फल यानी बेकार हो जाता है, भगवान उसे ग्रहण नहीं करते।
तुलसी के बिना भोग क्यों नहीं लगता?
विष्णु जी का अवतार: भगवान कृष्ण विष्णु जी के रूप हैं और बिना तुलसी के भगवान विष्णु कोई भी भोग ग्रहण नहीं करते।
वृंदा का स्वरूप: पद्म पुराण (उत्तर खंड) के अनुसार, तुलसी को ‘वृंदा’ भी कहा जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि ‘वृंदावन’ का नाम उन्हीं के नाम पर पड़ा है।
शालिग्राम से विवाह: भगवान विष्णु के शालिग्राम रूप का विवाह तुलसी जी के साथ हुआ। इसलिए, हर शुभ काम और पूजा-पाठ में तुलसी का होना बेहद जरूरी है।




