नई एयर-टू-एयर मिसाइल का परीक्षण कर रहा अमेरिका

अमेरिकी नौसेना इन दिनों एक ऐसी नई हवा से हवा में मार करने वाली एयर-टू-एयर मिसाइल का परीक्षण कर रही है, जो 465 किलोमीटर से भी अधिक दूरी पर बैठे दुश्मन के ठिकानों को नेस्तनाबूद कर सकती है।
इस टेस्टिंग के साथ ही यह हथियार अपनी श्रेणी में दुनिया के सबसे लंबी दूरी वाले ज्ञात मिसाइल सिस्टम्स में से एक बन गया है।
स्टेल्थ फाइटर जेट्स में आसानी से हो सकेगी फिट
आरटीएक्स कॉर्प की सहायक कंपनी रेथियॉन द्वारा विकसित इस मिसाइल का नाम AIM-424 मैलिस है। अमेरिकी नौसेना के अनुसार, इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसका आकार वर्तमान पीढ़ी की AIM-120 AMRAAM मिसाइल के समान ही रहे।
इसके छोटे आकार का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे F-35 और F-22 जैसे अत्याधुनिक स्टेल्थ फाइटर जेट्स के वेपंस बे के अंदर आसानी से फिट किया जा सकता है।
भारत-पाकिस्तान तनाव के बाद से बदली रणनीति
पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव के बाद से लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलों के विकास पर दुनिया भर का ध्यान तेजी से गया है। उस दौरान पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसने भारतीय लड़ाकू विमानों को निशाना बनाने के लिए चीनी निर्मित मिसाइलों का इस्तेमाल किया था, जिनकी रेंज लगभग 300 किलोमीटर थी।
मैलिस जैसी लंबी दूरी की मिसाइलें अमेरिकी लड़ाकू विमानों को सुरक्षित दूरी से दुश्मन के एयरबोर्न कमांड-एंड-कंट्रोल विमानों और एरियल टैंकरों जैसे अति-महत्वपूर्ण लक्ष्यों को भेदने में सक्षम बनाएंगी।
चीनी बमवर्षकों से नौसैनिक बेड़े की सुरक्षा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मिसाइल का एक बड़ा उद्देश्य नौसैनिक बलों को लंबी दूरी के हवाई खतरों से बचाना भी है। रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स के पूर्व अधिकारी और ग्रिफिथ एशिया इंस्टीट्यूट के विजिटिंग फेलो पीटर लेटन के हवाले से ब्लूमबर्ग ने बताया कि यह मिसाइल विशेष रूप से चीन को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
लेटन ने कहा कि मुझे लगता है कि इसका मुख्य उद्देश्य लंबी दूरी की एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें दागने वाले चीनी बमवर्षकों का मुकाबला करना है। यह सिर्फ हवा से हवा में लड़ाई के लिए नहीं, बल्कि पूरे फ्लीट की हवाई सुरक्षा के लिए है।
लंबी दूरी के हमलों की तकनीकी चुनौतियां
इतनी अधिक दूरी से मिसाइल दागने के लिए लड़ाकू विमानों को अपने लक्ष्यों का पता लगाने और उन्हें ट्रैक करने के लिए बेहद उन्नत रडार सिस्टम की जरूरत होती है। साथ ही, हथियार को भी ऐसे सटीक गाइडेंस सिस्टम की आवश्यकता होती है जो इतनी लंबी दूरी तक लक्ष्य पर अपनी नजर बनाए रख सके।
इसके अलावा, दुश्मन के विमान भी मिसाइल से बचने के लिए अपनी दूरी बढ़ाने या चकमा देने की कोशिश कर सकते हैं, जिससे पार पाना एक बड़ी तकनीकी चुनौती है।
अमेरिका का लंबी दूरी की मिसाइलों पर फोकस
अमेरिकी नौसेना ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि AIM-424 मैलिस को कब तक सेना में आधिकारिक तौर पर शामिल किया जाएगा। हालांकि, पेंटागन लंबे समय से ऐसी मिसाइलों की तलाश में है।
इससे पहले अमेरिका F-14 टॉमकैट लड़ाकू विमान में AIM-54 फीनिक्स नामक बेहद लंबी दूरी की मिसाइल का इस्तेमाल करता था, लेकिन अब ये दोनों सिस्टम रिटायर हो चुके हैं।
वर्तमान में अमेरिका कई अन्य प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रहा है। इसी साल लॉकहीड मार्टिन को AIM-260 नामक एक अन्य लंबी दूरी की मिसाइल के उत्पादन के लिए करीब 1 अरब डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है।
इसके अलावा, अमेरिकी नौसेना के पास AIM-174B भी मौजूद है, जो 400 किलोमीटर से अधिक की रेंज वाली एक उन्नत मिसाइल है और कथित तौर पर कई वर्षों से चालू हालत में है।
हाल ही में नेवादा के रेनो में आयोजित अमेरिकी नौसेना की टेलहुक संगोष्ठी में रेथियॉन ने इस नई AIM-424 मैलिस मिसाइल से पर्दा उठाया, जिसने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।


