धर्म/अध्यात्म

क्या आप भी कजरी तीज पर रख रही हैं व्रत? थाली में जरूर शामिल करें सुहाग के ये 5 सामान

कजरी तीज का पर्व सुहागिन महिलाओं और कुंवारी कन्याओं के लिए अधिक महत्वपूर्ण है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को विधिपूर्वक करने से पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है और वैवाहिक जीवन में सदैव सुख-शांति बनी रहती है।

इस खास अवसर पर मां पार्वती को सोलह श्रृंगार अर्पित करने का विधान है। अगर आपके पास श्रृंगार की 16 चीजें नहीं हैं, तो सुहाग की इन 5 चीजों को पूजा की थाली में जरूर शामिल करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि सुहाग की इन 5 चीजों को मां पार्वती को अर्पित करने से वैवाहिक जीवन में खुशियों का आगमन होता है और साथ ही कुंवारी कन्याओं के विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि कजरी तीज की पूजा थाली में किन चीजों को शामिल करना चाहिए।

पूजा थाली में क्या शामिल करें?
सिंदूर- हिंदू धर्म में सिंदूर को अखंड सौभाग्य, पवित्रता और सुहाग का प्रतीक माना जाता है। विवाहित महिलाएं अपनी मांग में सिंदूर लगाती हैं। इसे पति की लंबी आयु और मां पार्वती के आशीर्वाद का संकेत माना जाता है।

लाल या हरी चूड़ियां- कजरी तीज की पूजा थाली में लाल या हरी चूड़ियां भी शामिल करनी चाहिए। हिंदू धर्म में हरा रंग हरियाली और लाल रंग सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।

मेहंदी- कजरी तीज के अवसर पर पूजा के दौरान मां पार्वती को मेहंदी जरूर अर्पित करें। हिंदू धर्म में मेहंदी को सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। मेहंदी वैवाहिक जीवन में प्रेम और शुभता लाती है। पूजा के बाद मेहंदी को प्रसाद के रूप में अपने हाथों पर जरूर लगाएं।

बिंदी- सुहागिन महिलाएं अपने माथे पर बिंदी लगाती हैं। 16 श्रृंगार में बिंदी को अधिक महत्व दिया गया है। कजरी तीज की पूजा थाली में लाल बिंदी को जरूर शामिल करें। इससे आपको जीवन में शुभ परिणाम प्राप्त होंगे।

लाल चुनरी- मां पार्वती को लाल चुनरी चढ़ाने का बहुत महत्व है। पूजा के दौरान मां पार्वती को सच्चे मन से लाल चुनरी अर्पित करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस उपाय को करने से मां पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

कब है कजरी तीज?
हर साल कजरी तीज का व्रत भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर रखा जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार यह व्रत 31 अगस्त को रखा जाएगा।

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