संस्कृति और आधुनिकता का संगम जेवर एयरपोर्ट, गंगा तट की स्मृतियां; सुनाई देती है ब्रज की धड़कन

‘पहली बार जब मैं नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने पहुंचा, तो यह किसी आध्यात्मिक यात्रा के आरंभ होने जैसा था। पत्थर की नक्काशी, वाराणसी और हरिद्वार के गंगा तट की स्मृतियां और ब्रज की सांस्कृतिक धड़कन एक साथ जीवंत हो उठीं। ऐसा लगा जैसे ब्रज की छांव से होते हुए किसी आधुनिक दुनिया में प्रवेश की यात्रा है। छत की लहरदार बनावट, जो नदियों की गति से प्रेरित है। जैसे ही सुरक्षा जांच के बाद खुला आंगन (ओपन-एयर कोर्टयार्ड) आता है, वहां की ताजी हवा में बैठकर कुछ देर रुकने का मन अपने आप हो जाता है।’
तकनीक का अदृश्य जादू
सब कुछ इतना सहज है कि तकनीक दिखती नहीं, बस काम करती है। डिजीयात्रा के जरिये बिना कागज के प्रवेश, सेल्फ-बैगेज ड्रॉप मशीनें, तेज सिक्योरिटी लेन.. यानी आप चलते रहते हैं और सिस्टम आपके साथ चलता है। 48 चेक-इन काउंटर, 20 सेल्फ बैगेज ड्रॉप, 9 सिक्योरिटी लेन, ये आंकड़े कागज पर बड़े लगते हैं, लेकिन असल में यह सब भीड़ महसूस ही नहीं होने देते।
कला और आध्यात्म
एयरपोर्ट के अंदर पद्मश्री परेश मैती की इंस्टॉलेशन’मिस्टिक एबॉड के सामने खड़े होकर ऐसा लगता है जैसे हजारों घंटियों की अनसुनी ध्वनि भीतर तक गूंज रही हो। यह सिर्फ देखने की चीज नहीं, महसूस करने की है। उनकी पेंटिंग जागृति के छह पैनल… काशी, सारनाथ स्तूप, ताज महल, मथुरा-वृंदावन, अयोध्या और महाकुंभ… भारत की आत्मा को एक ही फ्रेम में समेट देते हैं।
रनवे से लेकर आसमान तक…
जब आप रनवे के पास खड़े होकर उस 3,900 मीटर लंबे ट्रैक को देखते हैं, तो समझ आता है कि यह सिर्फ विमान उतरने की जगह नहीं, बल्कि उत्तर भारत की नई उड़ान का प्रतीक है। दुनिया के बड़े से बड़े विमान यहां आसानी से उतर सकते हैं। कोहरे में भी यहां का आईएलएस सिस्टम 24 घंटे काम करने के लिए तैयार है।
कार्गो हब किसानों को जोड़ेगा दुनिया से…
एयरपोर्ट के कार्गो जोन से फल, सब्जियां, डेयरी उत्पाद सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक जाएंगे। मैंने जब इस हिस्से को देखा, तो साफ लगा कि यह सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, बल्कि फार्म टू ग्लोबल की असली कहानी है। मल्टीमॉडल कार्गो हब प्रारंभिक चरण में 2.5 लाख मीट्रिक टन वार्षिक क्षमता के साथ संचालित होगा।


