ऐतिहासिक फैसला: अब ‘केरलम’ नाम से जाना जाएगा ‘केरल’

केंद्र की मोदी कैबिनेट ने दक्षिण भारतीय राज्य ‘केरल’ का नाम आधिकारिक तौर पर बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। मोदी कैबिनेट ने सेवा तीर्थ से यह पहला ऐतिहासिक निर्णय लिया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के समय से ही यह मांग उठ रही थी। ‘केरलम’ शब्द मलयालम भाषा और वहां की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य में विधानसभा चुनाव भी करीब हैं।
विधानसभा को भेजा जाएगा ड्राफ्ट
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब नाम परिवर्तन से संबंधित Bill को केरल विधानसभा में अंतिम सहमति के लिए भेजा जाएगा। केरल विधानसभा ने 24 जून 2024 को सर्वसम्मति से इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा था। इससे पहले अगस्त 2023 में भी ऐसा ही प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन गृह मंत्रालय के तकनीकी सुझावों के बाद इसे दोबारा संशोधित कर भेजा गया था। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन का उद्देश्य है कि संविधान की आठवीं अनुसूची में दर्ज सभी भाषाओं में राज्य का नाम अब ‘केरलम’ के रूप में ही पहचाना जाए।
राजनीतिक और सांस्कृतिक महत्व
इस बदलाव की मांग को केवल सत्तापक्ष ही नहीं, बल्कि विपक्ष का भी समर्थन प्राप्त था। केरल बीजेपी अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने भी पीएम मोदी को पत्र लिखकर ‘केरलम’ नाम अपनाने का आग्रह किया था। कैबिनेट की इस पहली बैठक में सरकार ने स्पष्ट किया कि ‘सेवा तीर्थ’ से लिए गए सभी निर्णय देश के 140 करोड़ नागरिकों के हितों को सर्वोपरि रखकर लिए गए हैं।

