मासिक दुर्गाष्टमी आज, इस विधि से करें पूजा

आज फाल्गुन महीने की मासिक दुर्गाष्टमी मनाई जा रही है। हिंदू धर्म में हर महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक दुर्गाष्टमी के रूप में मनाया जाता है। यह दिन जगत जननी मां दुर्गा को समर्पित है। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त इस दिन पूरी श्रद्धा से मां की पूजा-अर्चना करते हैं, उनके जीवन से भय, रोग-दोष और दरिद्रता का नाश होता है। आइए इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं –
शुभ मुहूर्त (Masik Durgashtami 2026 Shubh Muhurat)
अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से दोपहर 12 बजकर 57 मिनट तक
अमृत काल – दोपहर 12 बजकर 51 मिनट से दोपहर 02 बजकर 22 मिनट तक।
मासिक दुर्गाष्टमी पूजन विधि (Masik Durgashtami 2026 Puja Vidhi)
सबसे पहले स्नान कर लाल रंग के कपड़े पहनें।
इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत और पूजा का संकल्प लें।
एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें।
अगर घर में मंदिर है, तो वहां गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें।
मां को लाल फूल, लाल चंदन, अक्षत और सिंदूर चढ़ाएं।
मां दुर्गा को लाल चुनरी और शृंगार की सामग्री जरूर चढ़ाएं।
मां को फल, मिठाई व घर में बने हलवे-पूरी का भोग लगाएं।
दीपक और धूप जलाकर दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
अगर समय हो, तो दुर्गा सप्तशती के कुछ अध्यायों का पाठ भी जरूर करें।
अंत में घी के दीपक से मां की भाव के साथ आरती करें।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
इस दिन पूरी तरह सात्विक रहें।
तामसिक भोजन का सेवन भूलकर भी न करें।
व्रत रखने वाले जातकों को इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें।
किसी की निंदा न करें और न ही गुस्सा करें, क्योंकि मां दुर्गा वहीं वास करती हैं जहां प्यार और शांति होती है।
अगर आपने अखंड ज्योति जलाई है, तो ध्यान रखें कि वह बुझने न पाए और घर को खाली न छोड़ें।
।।आरती अम्बा जी।।
जय अम्बे गौरी,मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत,हरि ब्रह्मा शिवरी॥
जय अम्बे गौरी
माँग सिन्दूर विराजत,टीको मृगमद को।
उज्जवल से दोउ नैना,चन्द्रवदन नीको॥
जय अम्बे गौरी
कनक समान कलेवर,रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला,कण्ठन पर साजै॥
जय अम्बे गौरी
केहरि वाहन राजत,खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत,तिनके दुखहारी॥
जय अम्बे गौरी
कानन कुण्डल शोभित,नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर,सम राजत ज्योति॥
जय अम्बे गौरी
शुम्भ-निशुम्भ बिदारे,महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना,निशिदिन मदमाती॥
जय अम्बे गौरी
चण्ड-मुण्ड संहारे,शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे,सुर भयहीन करे॥
जय अम्बे गौरी
ब्रहमाणी रुद्राणीतुम कमला रानी।
आगम-निगम-बखानी,तुम शिव पटरानी॥
जय अम्बे गौरी
चौंसठ योगिनी मंगल गावत,नृत्य करत भैरूँ।
बाजत ताल मृदंगा,अरु बाजत डमरु॥
जय अम्बे गौरी
तुम ही जग की माता,तुम ही हो भरता।
भक्तन की दुःख हरता,सुख सम्पत्ति करता॥
जय अम्बे गौरी
भुजा चार अति शोभित,वर-मुद्रा धारी।
मनवान्छित फल पावत,सेवत नर-नारी॥
जय अम्बे गौरी
कन्चन थाल विराजत,अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत,कोटि रतन ज्योति॥
जय अम्बे गौरी
श्री अम्बेजी की आरती,जो कोई नर गावै।
कहत शिवानन्द स्वामी,सुख सम्पत्ति पावै॥
जय अम्बे गौरी।।




